Monday, April 12, 2010

"कथा या व्यथा हमारे संविधान की"


आज क्लास में जब बात हुई , "संविधान " की , तब मेरी सोच का दायरा इंच मात्र ही सही लेकिन बढ़ गया और कुछ लिखने के लिए प्रेरित कर गया ।
बात शुरू हुई थी हमारे यहाँ के रोज होने वाले पुलिस केसेस , नए- नए नियमों के बनने, उनमे संशोधन होने और फिर भी क़ानून को ठेंगा दिखाते लोगों की । बातों ही बातों में पता चला की ब्रिटेन एक ऐसा देश है जहाँ पर कोई लिखित संविधान नहीं है, फिर भी शायद वहा के लोग भारत के महान नागरिकों की अपेक्षा काफी आगे और सुधरे हुए हैं।
एक हमारा देश जहाँ का संविधान सबसे लम्बा चौड़ा है, अगर कहा जाये तो सबसे बड़ा लिखित संविधान है, सबसे ज्यादा समय लगा जिसे बनने में और सबसे कम समय लगता है इसमें संशोधन होने में और उससे भी कम समय लगता है इसमें बनाये गए नियमों के टूटने में !!!!
फिर भी हम महान हैं। अक्सर भारत के कुछ उच्च वर्ग या कहा जाये महान वर्ग के महान लोग कहते हैं की भारत २० सालों में विकसित देशों की लिस्ट में शामिल होगा, सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा , अरे भाई!!! लेकिन इसमें भी सबसे बड़ा सवाल यह उठता है की जहाँ किसी नए नियम, कानूनों और छोटे - छोटे प्रस्तावों को पारित होने में २० साल लग जाते हैं , वो २० सालों में इतना महान बन कैसे पायेगा !!!!!! लगता तो नहीं लेकिन अगर ऐसा होता है तो ये तो महानता की सारी हद पार हो जाएगी और ऐसी हद के पार होने का हमें बेसब्री से इंतजार रहेगा ।
खैर इतना कहने को तो मैंने भी कह दिया लेकिन लिखते लिखते ही ख्याल आया की क्या मै उन लोगों से अलग हूँ जो कहते तो हैं आदर्श भरी बातें , लेकिन खुद ही इन्हें भुला देते हैं और उत्तर आया, वही जाना पहचाना "नहीं"।
तो कुल मिलकर इतना कहने का हक तो मुझे भी नहीं है लेकिन अपने ही संविधान के आर्टिकल १९(a)"अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" का पालन करते हुए कह दिया। आशा करुँगी खुद से और आपसे की इस एक्ट के अलावा अन्य भी एक्ट्स का पालन करेंगे और सोच के साथ -साथ अपने देश को भी महान बनाने में मदद करेंगे ।

1 comment:

  1. काश हम सब ऐसे हो जाते
    आभार

    ReplyDelete