Wednesday, March 17, 2010

"रिक्शे भरोसे युवा महान"


मैंने अक्सर देखा है, की भारत की "युवा पीढ़ी " थोड़ी- थोड़ी दूर के लिए दूसरे इंसान पर निर्भर होती है ।
मै बात कर रही हू , आरामपसंद युवाओं की, जिनको भारत का भविष्य कहा जाता है । अक्सर ये युवा १/२ किलो मी. की दूरी को रिक्शे से तय करना पसंद करते हैं और पैदल चलते लोगों को देख कर काफी गर्व महसूस करते हैं । लेकिन सोचने वाली बात यह है , की जो युवा पीढ़ी खुद के बोझ को नहीं उठा सकती , वो इस देश की जिम्मेदारी को क्या निभाएंगे ?
रिक्शे वाले जो कि इन युवाओ को उनकी मंजिल तक पहुंचाते हैं , उनसे ये रोड पर खड़े हो कर २ रुपये के लिए झगडा कर अपना समय बर्बाद कर देते हैं और कुछ तो ४० रुपये कि गोली तक !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
लेकिन यही रुतबे वाले लोग बड़े बड़े मॉल में २०० रुपये कि जगह ४०० रुपये दे कर आते हैं और कुछ भी नहीं बोल पाते हैं.
सोचने वाली बात ये है कि , क्या यही भविष्य है हिन्दुस्तान का ??????????????
रिक्शे वालों के भरोसे घूमते युवा , जिनको खुद के पैरों पर भरोसा नहीं या अपने से कमजोर लोगों पर गुस्सा निकालते युवा या फिर कुछ और !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

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