
कई बार हमने सुना है और देखा भी है , की वृक्ष हमारे मित्र हैं और सच भी है। लेकिन जैसे सभी आफर पर कंडीशन अप्लाई का बोर्ड लगा होता है, ठीक वैसे ही वृक्षों पर भी है। मैं नहीं कहती की ऐसा सबके साथ है, पर हमारे साथ है। एक दिन घर की बालकनी में बैठे हुए मेरे मन में कुछ ऐसा ही विचार आया। दरअसल , हमारे घर के सामने चार अशोक के पेड़ हैं, काफी लम्बे और हरे-भरे। गर्मियों के मौसम में जब ये पेड़ सूर्य देवता के प्रकोप मतलब उनकी भयंकर धूप की छाया से हमें बचाते हैं, तो साक्षात भगवान् विष्णु नजर आते हैं, (ऐसा इसलिए कह रही हूँ की अक्सर टी.वी प्रोग्राम्स में मैंने देखा है कि सारी चिंता दुःख परेशानी से भगवान् विष्णु ही हमें बचाते हैं )। लेकिन ठण्ड आते ही जब इनकी यही आदत "टू बी ........................" रहती है, तो इन्ही वृक्षों में "शनि देव" के दर्शन हो जाते हैं। ये तो हुई मजाक कि बात, लेकिन जब हम इसे अपनी रोजमर्रा कि जिंदगी से जोड़कर देखें तो लगता है कि, कि पूरी लाइफ-साइकिल इन दो मौसमों कि तरह है। हमारा परिवार इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। एक समय ऐसा होता है, जब हम अपने माँ बाप पर पूरी तरह निर्भर होते हैं और एक समय वो भी होता है जब हमारे माँ बाप हम पर निर्भर होते हैं। ये जो दो समय होते हैं दो मौसमों कि झलक दिखला देते हैं। जब माँ- बाप हमें जिंदगी कि धूप से बचाते हैं , तो वो हमें भगवान् से बढ़कर नजर आते हैं, लेकिन जब वो हमसे कुछ आशा करते हैं, तो वही माँ-बाप ठण्ड में पड़ी ओस कि बूँद नजर आते हैं और यह लगने लगता है, कि वो खुशियों कि रोशनी हम तक नहीं आने दे रहे हैं। पर हमें अपनी सोच को बदलना होगा, अपनी जिम्मेदारियों को समझना पड़ेगा और अपने माँ-बाप के लिए "कंडीशन अप्लाई ..........................." का बोर्ड हटाना होगा...............
मज़ा आ गया पढ़ कर जितना ज्यादा लिखेंगी उतना लेखन और निखरेगा
ReplyDeleteबधाई
THANK U SIR
ReplyDeleteND I'LL TRY......